Thursday, August 20, 2009

खाव्बों की दुनिया


खाव्बों की दुनिया ना जाने कहाँ से आई ये धुंधले बादलों की दुनिया
घनघोर अँधेरे में उजली किरण सी दुनिया
काले आकाश में चमकते तारों की दुनिया
रेतीले मैदान में हरयाली की दुनिया
अँधेरी रात में जगमगाते जुगनुओं की दुनिया
धूल भरी आंधी में महकते फूलों की दुनिया
झुलसाती धूप में रिमज़िम फुहारों की दुनिया
उफनाते तूफान में गहराईयों की दुनिया
सिसकियों में गूंजती हसी की दुनिया
सन्नाटे में मीठी आवाज़ की दुनिया
हार में हार को हराने की दुनिया
हताशा में आशाओं की दुनिया
दिलों में कितने अरमानो की दुनिया
ख्वाबों की दुनिया ...........
न जाने कितने अफसानो की दुनिया
न जाने कहाँ से आई ये धुंधले बादलों की दुनिया

~~ स्तुति

No comments:

Post a Comment